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राहुल के दौरे के बाद धामी सरकार सक्रिय, सात मोड़ पर पेड़ों की कटाई रोकी

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 11 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन

देहरादून/ऋषिकेश। देहरादून के सात मोड़ सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्रस्तावित करीब तीन हजार पेड़ों की कटाई का मामला अब राजनीतिक और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के देहरादून दौरे के दौरान आंदोलनकारियों से मुलाकात और इस मुद्दे को संसद में उठाने के आश्वासन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक लगाने की घोषणा की है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पर्यावरण विशेषज्ञों तथा अन्य सभी हितधारकों के साथ दोबारा विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों और निर्णय का पूरा सम्मान किया जाएगा। साथ ही, जब तक सभी पक्षों के बीच संतोषजनक सहमति और विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान स्थगित रहेगा। सरकार का कहना है कि इस संबंध में केंद्र सरकार से भी चर्चा की गई है।


उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अपने देहरादून दौरे के दौरान "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम के बाद सीधे सात मोड़ पहुंचे थे, जहां पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। राहुल गांधी ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि वह इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में उठाएंगे।


इधर, कांग्रेस ने सरकार के फैसले को जनदबाव और राहुल गांधी के हस्तक्षेप का परिणाम बताया है। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि सात मोड़ पर कई दिनों से पेड़ों की कटाई जारी थी। प्रदर्शनकारियों की अपील पर राहुल गांधी ने मामले को गंभीरता से लिया और संसद में उठाने का आश्वासन दिया। उनके अनुसार इसके बाद धामी सरकार को पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने का निर्णय लेना पड़ा।


सात मोड़ का यह मुद्दा अब केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर प्रदेश की राजनीति का अहम विषय बन गया है। सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने स्तर पर इस फैसले का श्रेय लेने में जुटे हैं।

 
 
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