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राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण की अमिट विरासत छोड़ गए बीसी खंडूड़ी, SGRRU परिवार भावुक

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 14 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन

देहरादून। उत्तराखण्ड की राजनीति, जनसेवा और सुशासन का एक स्वर्णिम अध्याय सोमवार को उस समय इतिहास बन गया, जब प्रदेश के वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भूवन चन्द्र खण्डूड़ी का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रसेवा, अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल रहे खंडूड़ी को श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय एवं SGRRU परिवार ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें “जनमानस का सच्चा प्रहरी” बताया।


SGRRU परिवार ने कहा कि खंडूड़ी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे उस विचारधारा के प्रतिनिधि थे, जहां सत्ता सेवा का माध्यम होती है। उनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रहित, पारदर्शिता और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। सेना के अनुशासन और संत जैसी सादगी ने उन्हें राजनीति में भी विशिष्ट पहचान दिलाई।


विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मेजर जनरल (से.नि.) भूवन चन्द्र खण्डूड़ी का व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी का दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के प्रति विशेष श्रद्धाभाव था। वे समय-समय पर श्री दरबार साहिब पहुंचकर व्यवस्थाओं का अवलोकन करते और समाजसेवा से जुड़े कार्यों की सराहना करते थे।


SGRRU परिवार ने स्मरण किया कि खंडूड़ी सदैव शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देते रहे। वे एसजीआरआर ग्रुप द्वारा संचालित संस्थानों के सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते थे। उनका स्नेह, मार्गदर्शन और आत्मीयता संस्थान परिवार के लिए अमूल्य धरोहर रहेगी।


वर्ष 2007 में पहली बार उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बने खंडूड़ी ने अपने कार्यकाल में सुशासन, पारदर्शिता और विकास की ऐसी मिसाल कायम की, जिसे आज भी राजनीतिक शुचिता के उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। एक सैनिक की दृढ़ता और जननेता की संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व में अद्भुत रूप से समाहित थी।


आज उनके निधन से केवल एक नेता नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आत्मा से जुड़ा एक सशक्त स्वर मौन हो गया है। SGRRU परिवार ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ उन्हें शत-शत नमन किया।

 
 
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