श्री गुरु राम राय जी महाराज के महानिर्वाण पर्व पर उमड़ा आस्था का सैलाब, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
देहरादून। गुरु भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक आस्था से सराबोर देहरादून का पावन दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के 340वें महानिर्वाण पर्व का साक्षी बना। शनिवार को श्री झण्डे जी परिसर में दिनभर गुरुवाणी के स्वर गूंजते रहे और देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज की समाधि पर शीश नवाकर श्रद्धा अर्पित की।
महानिर्वाण पर्व के अवसर पर दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के सज्जादे गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना कर गुरु महिमा का स्मरण किया। उन्होंने संगत को गुरु भक्ति और गुरु कृपा का महत्व बताते हुए कहा कि गुरु ज्ञान और मार्गदर्शन के माध्यम से मनुष्य ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
गुरु कृपा से शिष्य का जीवन सार्थक एवं धन्य होता है। पर्व के अवसर पर श्री झण्डे जी परिसर स्थित पवित्र सरोवर के किनारे श्री गुरु राम राय जी महाराज को तर्पण अर्पित किया गया। इसके बाद 17 पुरोहितों ने चावल, दूध, शहद, गंगाजल, घी और शक्कर से विधिवत पूजा-अर्चना की।
धार्मिक अनुष्ठान के बाद संगत को फलों का प्रसाद वितरित किया गया तथा विशेष लंगर का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं को हलवा-पूरी और चूरमा का प्रसाद भी वितरित किया गया।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की चिकित्सकीय टीम तैनात रही। वहीं, श्री गुरु राम राय जी महाराज को समर्पित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में संगत ने 142 यूनिट रक्तदान किया। श्री महाकाल सेवा समिति की ओर से श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित शिविर का शुभारंभ श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने रक्तदाताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया और आशीर्वाद दिया। समिति अध्यक्ष रोशन राणा ने बताया कि शिविर में महिलाओं और पुरुषों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।
ब्लड बैंक टीम की ओर से उप वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी हरीशंकर का विशेष योगदान रहा। उल्लेखनीय है कि श्री गुरु राम राय जी महाराज का जन्म 1646 ई. में चैत्र मास की पंचमी को हुआ था और 1676 ई. में वे देहरादून आए। उन्होंने देहरादून को अपनी कर्मस्थली बनाया। भाद्रसुदी 8 संवत 1744 (4 सितंबर 1687) को परमात्मा का ध्यान करते हुए वे परमात्मा में लीन हुए। उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष महानिर्वाण पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और गुरु कृपा की कामना की।







