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गुरुकुल में वैदिक परंपरा का गौरवपूर्ण उत्सव — श्रद्धा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का संदेश

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 11 घंटे पहले
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हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में महर्षि दयानन्द ऋषि बोधोत्सव पर्व एवं स्वामी श्रद्धानंद जयंती के उपलक्ष्य में भव्य यज्ञ, विचार गोष्ठी तथा प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों और ब्रह्मचारियों ने वैदिक परंपरा के महान आचार्य महर्षि दयानन्द सरस्वती तथा उनके परम शिष्य स्वामी श्रद्धानंद के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं ने स्वामी श्रद्धानंद को महर्षि दयानन्द का सच्चा गुरुभक्त शिष्य बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने गुरु की आज्ञा पालन हेतु जीवन और परिवार तक को समर्पित कर दिया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अनेक क्रांतिकारी देशभक्तों ने स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान दिए।

इस अवसर पर प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक वर्गों में प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता आयोजित की गई। संयोजक अशोक आर्य और अश्विनी कुमार ने बताया कि प्रथम चरण में लगभग 40 प्रतिभागियों तथा फाइनल राउंड में 20 प्रतिभागियों ने भाग लेकर दोनों महापुरुषों के जीवन चरित्र को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।

मुख्याधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा ने महर्षि दयानन्द और स्वामी श्रद्धानंद को राष्ट्र जागरण का अग्रदूत बताते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। प्रधानाचार्य डॉ. विजेन्द्र शास्त्री ने ऋषि बोधोत्सव को देश के वैचारिक परिवर्तन का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने गुरुकुल की स्थापना कर अंग्रेजी शासन के सामने नई वैचारिक चुनौती प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के सह संयोजक वेदपाल सिंह और डॉ. ब्रजेश कुमार ने आयोजन व्यवस्था संभाली, जबकि लोकेश शास्त्री (पीटीआई) ने भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में गुरुकुल के आचार्यगण, कर्मचारी और ब्रह्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 
 
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