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वैदिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा का संगम: गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में दयानंद जयंती संगोष्ठी

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 10 घंटे पहले
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हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी

समविश्वविद्यालय के योग विभाग सभागार में दयानंद जयंती की पूर्व संध्या पर “महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन दर्शन एवं उनकी शिक्षाएं” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।



कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन और उनके विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “वेदों की ओर लौटो” का उनका संदेश समाज में बौद्धिक एवं सामाजिक जागरण का आह्वान था। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद ने वेदों को प्रमाणित ज्ञान का आधार बताते हुए अंधविश्वास, कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष किया तथा समाज को नई दिशा दी।



प्रमुख वक्ता अनुज शास्त्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आर्य समाज ने राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया। महर्षि दयानंद के विचारों ने स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुधार की भावना को सशक्त किया।

योग एवं शारीरिक शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. सत्यदेव निगमांलकार ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी संस्थान ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रभक्ति और वैदिक मूल्यों के संवर्धन में अहम योगदान दिया। परीक्षा नियंत्रक प्रो. एल.पी. पुरोहित ने बताया कि विश्वविद्यालय में विज्ञान के साथ-साथ वैदिक विषयों का अध्ययन कराया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को समन्वित शिक्षा मिलती है।



डॉ. दीनदयाल वेदालंकार ने कहा कि महर्षि दयानंद के विचारों को समझने के लिए वेदों का गहन अध्ययन आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऊधम सिंह ने किया। अंत में सभी ने महर्षि दयानंद के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

 
 
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