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इंदिरेश अस्पताल के डॉ. जयकृत ने राष्ट्रीय मंच पर लहराया परचम, कार्डियोलॉजी क्विज में दूसरा स्थान

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 1 दिन पहले
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देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के डीएम कार्डियोलॉजी फाइनल ईयर रेजीडेंट डॉ. जयकृत चौधरी ने प्रतिष्ठित जेड.वाई.एम.ई.ए. कार्डियोलॉजी नेशनल क्विज फिनाले में दूसरा स्थान हासिल कर उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। खास उपलब्धि यह रही कि वह इस प्रतियोगिता के नेशनल फिनाले में पहुंचने वाले उत्तराखंड के एकमात्र कार्डियोलॉजिस्ट रहे और देश की शीर्ष छह फाइनलिस्ट टीमों में जगह बनाई।


राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के युवा चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में डॉ. चौधरी ने अपने चिकित्सकीय ज्ञान, क्लिनिकल समझ, त्वरित निर्णय क्षमता और विश्लेषणात्मक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्होंने नेशनल फिनाले में स्थान सुनिश्चित किया।


नेशनल फिनाले में देशभर की शीर्ष छह फाइनलिस्ट टीमों ने प्रतिभाग किया, जिसमें डॉ. जयकृत चौधरी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि से श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, देहरादून और उत्तराखंड के चिकित्सा क्षेत्र में खुशी का माहौल है।


अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने डॉ. जयकृत चौधरी की सफलता पर उन्हें तथा कार्डियोलॉजी विभाग की पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन अस्पताल के लिए गौरव की बात है।


कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कैथ लैब डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. तनुज भाटिया ने भी डॉ. चौधरी की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नेशनल फिनाले तक पहुंचना उनकी प्रतिभा, मेहनत और चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर सीखने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।


जेड.वाई.एम.ई.ए. कार्डियोलॉजी नेशनल क्विज युवा एवं प्रतिभाशाली चिकित्सकों के चिकित्सा ज्ञान, क्लिनिकल सोच, त्वरित निर्णय क्षमता और नवीनतम चिकित्सकीय जानकारी को परखने वाली राष्ट्रीय स्तर की अकादमिक प्रतियोगिता है। इसमें कार्डियोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन सहित विभिन्न चिकित्सा विषयों से जुड़े सवालों के माध्यम से प्रतिभागियों की विशेषज्ञता का आकलन किया गया।

 
 
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