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नवजातों की जिंदगी बचाने की दिशा में बड़ी पहल, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 22 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन

देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में आयोजित एक दिवसीय सीएमई कार्यक्रम में गर्भ में पल रहे शिशुओं के हृदय रोगों की समय रहते पहचान को लेकर विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। आईआरआईए उत्तराखण्ड स्टेट चैप्टर के तत्वावधान में आयोजित इस वैज्ञानिक कार्यक्रम में “फीटल ईको” तकनीक को नवजातों के लिए जीवनरक्षक बताते हुए विशेषज्ञों ने इसका लाइव डैमो भी प्रस्तुत किया।


कार्यक्रम का आयोजन श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज के सभागार में किया गया, जिसमें उत्तराखण्ड के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से रेडियोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ सीएमओ देहरादून डॉ. मनोज शर्मा, श्री गुरु Ram राय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रथापन पिल्लई, प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा, आयोजन अध्यक्ष डॉ. राजीव आजाद एवं आयोजन सचिव डॉ. राजेन्द्र श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।


मुख्य वक्ता बैंगलौर के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. सी. कृष्णा ने कहा कि “फीटल ईको” गर्भ में पल रहे शिशु के हृदय की संरचना, धड़कन और कार्यप्रणाली की सूक्ष्म जांच करने वाली अत्याधुनिक तकनीक है। इसके माध्यम से जन्मजात हृदय रोग, वाल्व संबंधी समस्याएं और अन्य जटिलताओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गर्भ में ही बीमारी की पहचान होने से जन्म के तुरंत बाद उपचार की तैयारी संभव हो जाती है, जिससे नवजात की जान बचाने में बड़ी मदद मिलती है।


सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रही हैं। वहीं कुलपति डॉ. प्रथापन पिल्लई ने कहा कि इस प्रकार के अकादमिक और वैज्ञानिक कार्यक्रम चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।


सीएमई के दौरान आधुनिक रेडियोलॉजी, फीटल मेडिसिन एवं कार्डियक इमेजिंग के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों के बीच वैज्ञानिक संवाद, केस स्टडी और अनुभवों का आदान-प्रदान आकर्षण का केंद्र रहा।

 
 
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