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एसआरएचयू में फार्मेसी के भविष्य पर वैश्विक संवाद, तकनीक और मानवीय संवेदना के संगम पर जोर

लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
Uttarakhandnews Network
2 घंटे पहले
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देहरादून/डोईवाला। स्वास्थ्य सेवाओं का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव के साथ फार्मासिस्ट की पारंपरिक भूमिका भी दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लिनिकल फार्मेसी, फार्माकोविजिलेंस और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते प्रभाव के बीच भविष्य के फार्मासिस्ट की भूमिका किस तरह विकसित होगी, इस पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट में गंभीर विमर्श हुआ।


विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर एसआरएचयू के स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज की ओर से आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने फार्मेसी के बदलते परिदृश्य और स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्टों की बढ़ती जिम्मेदारियों पर विचार साझा किए। ‘स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में इस बात पर जोर रहा कि तकनीकी प्रगति के दौर में फार्मासिस्ट को केवल औषधि विशेषज्ञ नहीं, बल्कि मरीज की समग्र स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने के लिए तैयार करना होगा।


आदि कैलाश सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. स्वामी राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। एसआरएचयू के कुलपति डॉ. प्रसाद ए. वाडेगांवकर ने कहा कि भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और वैक्सीन उत्पादन के क्षेत्र में भी उसकी उल्लेखनीय भागीदारी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी बदलाव और मरीजों की बदलती अपेक्षाओं के बीच फार्मासिस्टों की जिम्मेदारियां लगातार व्यापक हो रही हैं। ऐसे में भावी फार्मासिस्टों को नई तकनीक, उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों और पेशेवर अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करना समय की आवश्यकता है।


संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय औषधीय महासंघ की भारत दूत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया फार्मा मंच की उपाध्यक्ष डॉ. मंजरी घरत ने स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों के सशक्तिकरण पर मुख्य व्याख्यान दिया। विकास औषधीय विज्ञान महाविद्यालय, तेलंगाना के निदेशक प्रो. डॉ. रमेश अडेपु ने जन-केंद्रित स्वास्थ्य देखभाल में सामाजिक फार्मेसी की भूमिका पर प्रकाश डाला। मलेशिया के प्रबंधन एवं विज्ञान विश्वविद्यालय की नैदानिक फार्मेसी कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. फैज अहमद शेख ने क्लिनिकल फार्मेसी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से मरीजों की देखभाल की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं भारतीय औषधकोष आयोग के सौरभ साहू ने फार्माकोविजिलेंस और स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की उपयोगिता की जानकारी दी।


कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से जिम्मेदार फार्मासिस्ट की भूमिका को रेखांकित किया। इस दौरान स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज की ई-पत्रिका ‘द डिस्टिल्ड लेजर’ का विमोचन भी किया गया। पत्रिका में जनवरी से जून तक की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों, उपलब्धियों, समझौता ज्ञापनों, अतिथि व्याख्यानों, कार्यशालाओं, औद्योगिक भ्रमणों और विद्यार्थियों की रचनात्मक गतिविधियों को स्थान दिया गया है।


कार्यक्रम में महानिदेशक शैक्षणिक विकास डॉ. विजेन्द्र चौहान, डीन डॉ. प्रीति कोठियाल सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, विशेषज्ञ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 
 
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