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परियोजना क्रियान्वयन में पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर जोर, देहरादून में उच्चस्तरीय कार्यशाला आयोजित

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 1 दिन पहले
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देहरादून। उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और सतत कृषि विकास को मजबूती देने की दिशा में उत्तराखंड जलवायु अनुकूल वर्षा आधारित कृषि परियोजना (यूसीआरआरएफपी) के अंतर्गत जलागम निदेशालय, देहरादून में पर्यावरण एवं सामाजिक अभिमुखीकरण विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विश्व बैंक समर्थित परियोजना के अंतर्गत लागू पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों की समझ विकसित करना तथा उनके प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला में विश्व बैंक के विशेषज्ञ श्री अनुपम जोशी एवं सुश्री ईवा द्वारा विश्व बैंक के पर्यावरण एवं सामाजिक ढांचा (ईएसएफ) तथा पर्यावरण एवं सामाजिक प्रबंधन ढांचा (ईएसएमएफ) पर विस्तृत तकनीकी सत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों में परियोजना क्रियान्वयन के दौरान संभावित पर्यावरणीय जोखिमों की पहचान, सामाजिक प्रभावों का आकलन तथा उनके शमन उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सरोकारों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। आदिवासी जनजाति योजना ढांचा, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता, यौन शोषण एवं उत्पीड़न की रोकथाम, श्रम प्रबंधन प्रक्रियाएं तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने सत्रों में सक्रिय सहभागिता करते हुए व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

यह कार्यशाला हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई, जिसमें परियोजना क्षेत्र में कार्यरत कार्मिकों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। कार्यशाला में प्रमुख रूप से परियोजना निदेशक कहकशां नसीम, संयुक्त निदेशक डा. ए.के. डिमरी, उपनिदेशक डा. एस.के. सिंह, डा. डी.एस. रावत, डा. सिद्धार्थ श्रीवास्तव, श्री अजय कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

कार्यशाला के माध्यम से परियोजना से जुड़े कार्मिकों की क्षमता वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में ठोस पहल की गई।

 
 
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