top of page

न्याय की कसौटी पर विफल अभियोजन, सभासदों को मिला संदेह का लाभ

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 1 दिन पहले
  • 2 मिनट पठन

ऋषिकेश। न्याय की धीमी मगर अटल चाल ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सत्य को भटकाया जा सकता है, पर पराजित नहीं किया जा सकता। वर्ष 2016 में नगर पालिका ऋषिकेश से जुड़े बहुचर्चित विवाद प्रकरण में लगभग नौ वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय ने सभी आरोपित तत्कालीन सभासदों को दोषमुक्त कर दिया है।

मामले की जड़ें वर्ष 2016 में दर्ज उस प्राथमिकी से जुड़ी हैं, जिसमें तत्कालीन कर एवं राजस्व अधीक्षक नगर पालिका ऋषिकेश द्वारा आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन सभासद विकास तेवतिया, कविता शाह एवं अनीता बहल ने 9 सितंबर 2016 को भवन कर कार्यालय में निजी ताला लगाकर कार्यालय को बंद कराया। यह भी आरोप था कि ताला खुलवाने के प्रयास के दौरान तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष के साथ मारपीट की गई तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई।

पुलिस विवेचना के बाद यह मामला सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऋषिकेश (जनपद देहरादून) की अदालत में विचाराधीन रहा। अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष में कुल दस गवाह प्रस्तुत किए, किंतु बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं—शुभम राठी, मुकेश शर्मा एवं लक्षित खरोला—द्वारा की गई सघन जिरह में अभियोजन की पूरी कहानी न्यायालय के समक्ष बिखरती चली गई।

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि गवाहों की गवाही में गंभीर विरोधाभास हैं। कोई भी गवाह अभियोजन के आरोपों का ठोस एवं विश्वसनीय समर्थन नहीं कर सका। न तो घटना की परिस्थितियां संदेह से परे सिद्ध हो सकीं और न ही यह प्रमाणित किया जा सका कि अभियुक्तों द्वारा किसी प्रकार का अपराध किया गया हो या जानबूझकर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई हो।

न्यायालय ने इन तथ्यों के आधार पर अभियोजन को असफल मानते हुए सभी आरोपी सभासदों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह फैसला न केवल अभियुक्तों के लिए राहत है, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास रखने वाले समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है।

फैसले के पश्चात प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तत्कालीन सभासद विकास तेवतिया ने कहा कि उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक द्वेष के चलते झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा, “मैं एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जनता की आवाज उठा रहा था। मैंने न कोई अपराध किया और न ही कभी सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। आज न्यायालय के फैसले ने सत्य पर लगे सभी आरोपों के धुंध को साफ कर दिया है।

 
 
bottom of page