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हिम्स जौलीग्रांट की विशेषज्ञता को राष्ट्रीय मान्यता, आईसीएमआर की परियोजना में निभाएगा क्षेत्रीय नेतृत्व

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 10 मिनट पहले
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देहरादून/डोईवाला। अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संक्रमणों की रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण की दिशा में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स), जौलीग्रांट ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने हिम्स जौलीग्रांट को अपनी राष्ट्रीय संक्रमण नियंत्रण परियोजना के लिए देशभर में चयनित 16 संस्थानों में शामिल करते हुए क्षेत्रीय केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी है।


यह जिम्मेदारी हिम्स की संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, विशेषज्ञता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर अपनाए जा रहे संस्थागत दृष्टिकोण को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता के तौर पर देखी जा रही है। हिम्स जौलीग्रांट की अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति की अध्यक्ष डॉ. गरिमा मित्तल ने बताया कि संस्थान संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण को मरीजों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए निरंतर कार्य कर रहा है।


आईसीएमआर की इस परियोजना का उद्देश्य माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों में संक्रमण के प्रकोप की पहचान, निगरानी, जांच और नियंत्रण की क्षमता को संस्थागत रूप से मजबूत करना है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत संचालित होने वाली परियोजना को ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।


क्षेत्रीय केंद्र के रूप में हिम्स जौलीग्रांट जिला अस्पतालों, निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम तथा अन्य पात्र स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ेगा। इसके तहत संबंधित संस्थानों को संक्रमण रोकथाम एवं निगरानी, संक्रमण के प्रकोप की जांच, प्रयोगशाला परीक्षण और रोगाणुरोधी दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।


परियोजना के राष्ट्रीय स्तर पर 500 स्वास्थ्य संस्थानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 100 जिला अस्पताल और 400 निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण नियंत्रण की ऐसी क्षमता विकसित करना है, जिससे संक्रमण के मामलों की पहचान और प्रतिक्रिया अधिक वैज्ञानिक, समयबद्ध और प्रभावी तरीके से हो सके।


दो वर्ष की इस परियोजना का नेतृत्व डॉ. गरिमा मित्तल करेंगी। डॉ. हेम चंद्र पांडे, डॉ. सोएब अहमद, डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. अर्पणा सिंह, डॉ. निक्कू यादव, डॉ. नेहा शर्मा, डॉ. दिव्या अंथवाल और श्वेता सामंत सह-अन्वेषक के रूप में परियोजना से जुड़े हैं। वहीं डॉ. ए.के. देवरारी, डॉ. बिंदु डे और डॉ. किरण काटोच परियोजना में मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

 
 
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