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पुराने जौहड़ को मिला नया जीवन, धामी के विजन पर तिवारी ने तैयार कराया जल-सृष्टि पार्क

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 1 दिन पहले
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला में लंबे समय से उपेक्षित पड़े जौहड़ और पुराने तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से विकसित जल-सृष्टि पार्क अब क्षेत्रवासियों के लिए प्रकृति, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सुकून का नया ठिकाना बनकर तैयार है।


पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप विकसित किए गए पार्क में पुराने जलस्रोत के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्र का व्यापक सौंदर्यीकरण किया गया है। जलस्रोत को जलीय जीवों के अनुकूल बनाने के साथ नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।


एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं को धरातल पर उतार रहा है। मियांवाला का जौहड़ क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे अब आधुनिक सुविधाओं से युक्त जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है।


उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य महज सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि पुराने जलस्रोत का संरक्षण, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना है। सिटी फॉरेस्ट के बाद यह एमडीडीए की पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है।


पार्क में जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली इसकी खूबसूरती बढ़ा रहे हैं। यहां विकसित योग डेक और वॉकिंग ट्रैक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए उपयोगी होंगे, जबकि पार्क की अन्य सुविधाएं परिवारों, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी।


एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को संरक्षित करते हुए इसे जनसुविधाओं से जोड़ा गया है। योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाओं के माध्यम से लोगों को प्रकृति के करीब लाने का प्रयास किया गया है।


तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन, हरियाली और आधुनिक जनसुविधाओं का बेहतर समन्वय प्रस्तुत करता है।

 
 
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