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चार दशकों की सेवा परंपरा: निरंकारी मिशन ने फिर दिखाया मानवता का असली स्वरूप

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 24 अप्रैल
  • 1 मिनट पठन

ऋषिकेश/नई दिल्ली। संत निरंकारी मिशन द्वारा आयोजित मानव एकता दिवस ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सेवा, समर्पण और मानवता ही सच्चे धर्म के आधार हैं। बाबा गुरबचन सिंह की पावन स्मृति में आयोजित इस महाअभियान में देशभर में प्रेम, भाईचारे और सह-अस्तित्व का अद्भुत संगम देखने को मिला।

दिल्ली में ग्राउंड नंबर 8 पर आयोजित मुख्य समारोह में माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के सान्निध्य में विशाल सत्संग हुआ। वहीं देशभर के हजारों सत्संग केंद्रों पर भी श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

मिशन के सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने बताया कि इस अवसर पर भारत के करीब 200 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित कर लगभग 40 हजार यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। यह केवल सेवा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति मिशन की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।

ऋषिकेश में आयोजित सत्संग में क्षेत्रीय संचालक दिलबर पंवार ने कहा कि मिशन निरंतर समाज को नशामुक्ति, प्रेम और सेवा के मार्ग पर अग्रसर कर रहा है। बाबा हरदेव सिंह का संदेश—“रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं”—आज भी लाखों लोगों को प्रेरित कर रहा है।

 
 
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