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प्रोजेक्ट अमृत से प्रकृति संरक्षण की नई दिशा, मानवता और पर्यावरण का संतुलन

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 19 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन

ऋषिकेश। जल संरक्षण को जनांदोलन का रूप देने की दिशा में संत निरंकारी मिशन ने सेवा, समर्पण और जागरूकता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान के चौथे चरण के तहत देशभर में व्यापक स्तर पर प्राकृतिक जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण का अभियान चलाया गया, जिसमें लाखों स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

अभियान का संचालन सुदीक्षा महाराज और रमित के मार्गदर्शन में किया गया। 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 930 शहरों के 1600 से अधिक स्थानों पर आयोजित इस अभियान में लगभग 12 लाख स्वयंसेवक जुड़े। यह पहल केवल सफाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि जल संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी और आध्यात्मिक कर्तव्य के रूप में स्थापित करने का संदेश भी दिया गया।

त्रिवेणी घाट पर दिखा सेवा का संकल्प

ऋषिकेश स्थित त्रिवेणी घाट पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। स्वयंसेवकों ने गंगा नदी के तटों पर सघन सफाई कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सफाई के बाद आयोजित सत्संग में सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन का आधार बताते हुए मानवता और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया गया।

प्रोजेक्ट अमृत से जल संरक्षण को नई दिशा

यह अभियान संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत आयोजित किया गया, जो बाबा हरदेव सिंह की शिक्षाओं से प्रेरित है। अभियान का उद्देश्य समाज में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है।

मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ

मिशन द्वारा विकसित की जा रही संत निरंकारी हेल्थ सिटी जैसी परियोजनाएं सेवा को व्यवहार में उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। यह पहल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ करुणा और मानवीय संवेदनाओं को भी सशक्त करती है।

जल संरक्षण को जीवन दर्शन बनाने का आह्वान

अभियान के माध्यम से समाज को संदेश दिया गया कि स्वार्थरहित सेवा ही वास्तविक परिवर्तन की आधारशिला है। जल की स्वच्छता केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी भी है।

निःसंदेह, निरंकारी मिशन का यह अभियान जल संरक्षण को जनजागरूकता से जोड़ते हुए प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करने की एक प्रेरक पहल बनकर उभरा है।

 
 
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