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एसआरएचयू और जापान की यूनिवर्सिटी ऑफ सुकुबा मिलकर बढ़ाएंगे वैश्विक शोध सहयोग

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 5 घंटे पहले
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डोईवाला। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट में शनिवार को जापान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ सुकुबा के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पहुंचकर शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया। दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय शोध अनुदान तथा अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।

कार्यक्रम के दौरान एसआरएचयू के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग शोध और नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। उन्होंने दोनों विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शोध अनुदानों के लिए संयुक्त रूप से आवेदन करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी विश्वविद्यालय की ‘लाइफ का कंपास’ थीम के अनुरूप विद्यार्थियों को वैश्विक अवसर, बेहतर कौशल और शोध के नए आयाम उपलब्ध कराएगी।

प्रति कुलपति डॉ. ए.के. देवराड़ी ने दोनों विश्वविद्यालयों के बीच साझा किए गए विभिन्न शोध प्रस्तावों की जानकारी देते हुए भविष्य में संयुक्त अनुसंधान की व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं महानिदेशक (शैक्षणिक विकास) डॉ. विजेंद्र चौहान ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, स्वास्थ्य सेवाओं, शोध गतिविधियों, संस्थागत विकास और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ सुकुबा के वाइस प्रेसिडेंट प्रो. ओहनेदा ओसामु ने किया। उनके साथ इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज की प्रो. इसोदा हिरोको तथा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रो. फुकुशिगे मिजुहो भी मौजूद रहीं।

बैठक के दौरान एसआरएचयू के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों ने अपने-अपने विभागों की ओर से तैयार शोध प्रस्ताव प्रस्तुत किए। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की बहु-विषयक शोध क्षमता और सभी अकादमिक इकाइयों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थानों के बीच हुई चर्चा दीर्घकालिक और सार्थक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रतिनिधिमंडल ने भविष्य में चयनित क्षेत्रों में संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित करने तथा अकादमिक संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर दोनों संस्थानों के अधिकारियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन और बहु-विषयक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

 
 
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