गुरुकुल कांगड़ी में गूंजा गुरु का गौरव, शिक्षकों को बताया राष्ट्र के चरित्र का निर्माता
- Uttarakhandnews Network
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हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय-विभाग के प्रांगण में शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरुजनों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुकुल कांगड़ी के मुख्याधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा ने की। उन्होंने सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक ब्रह्मचारियों के प्राण होते हैं। बाल मन पर अंकित किया गया प्रत्येक संस्कार जीवनभर उसके चरित्र में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि विद्या मनुष्य के सर्वांगीण विकास का श्रेष्ठ माध्यम है और इसी उद्देश्य के कारण गुरुकुल की ख्याति पिछले 124 वर्षों से देश-दुनिया में बनी हुई है।
प्रधानाचार्य डॉ. विजेन्द्र शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल के ब्रह्मचारियों पर ही देश का भविष्य टिका है। यही युवा आर्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महर्षि दयानंद सरस्वती के स्वप्नों के भारत के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने शिक्षक दिवस को गुरुजनों के आत्मचिंतन का अवसर बताते हुए कहा कि शिक्षकों को विचार करना चाहिए कि वे ब्रह्मचारियों को किस प्रकार श्रेष्ठ चरित्रवान नागरिक बना सकते हैं।
गुरुकुल कांगड़ी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविकांत मलिक ने कहा कि शिक्षक समाज की वास्तविक नींव तैयार करता है। उन्होंने मां-बेटे की कहानी के माध्यम से गुरु के ज्ञान और संस्कार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सफलता के पीछे शिक्षक द्वारा दिए गए ज्ञान और संस्कार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बाल सभा अध्यक्ष अमर सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं, बल्कि गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। गुरुकुल की परंपरा में शिक्षकों से पुस्तकीय ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला भी मिलती है।
कार्यक्रम संयोजक वेदपाल सिंह ने कहा कि गुरुकुल में सभी पर्व आर्य पद्धति के अनुसार मनाए जाते हैं, जिसका प्रमुख उद्देश्य ब्रह्मचारियों के उत्तम चरित्र का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल के शिक्षक आर्य परंपरा का पालन करते हुए स्वामी श्रद्धानंद के सपनों को साकार करने के लिए संकल्पित हैं। अध्यापक अशोक कुमार आर्य ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक दिवस उनके जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने से पहले डॉ. राधाकृष्णन एक श्रेष्ठ शिक्षक थे और उनके जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व था।
कार्यक्रम में जितेन्द्र कुमार वर्मा, अशोक कुमार आर्य, हुकमचन्द, अश्विनी कुमार, अमर सिंह, ब्रजेश सिंह, वेदपाल सिंह, लोकेश सिंह, अमित कुमार, राज कमल, विजय कुमार, धर्म सिंह, गौरव शर्मा, मामराज सिंह, सत्यवीर सिंह, रविकांत मलिक, फकीरचन्द, रोहित बालियान, दिनेश कुमार, सज्जन सिंह, उदयराज, प्रभात मलिक, धीरज दत्त कौशिक, तुषार सिंह, मुकेश, अनुज, भास्कर पाण्डे, सुभांशु, योगेश शर्मा, धर्मेन्द्र आर्य, धर्मेन्द्र सिंह, गौरव मलिक, मोहित, अनिल, राहुल, विकास, आदर्श भारद्वाज सहित समस्त अधिष्ठातागण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।







