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सब्र, सेवा और सुधार का संदेश लेकर आया पवित्र रमजान महीना

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 20 घंटे पहले
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रुड़की। पवित्र रमजान माह की शुरुआत को लेकर मुस्लिम समाज में उत्साह का माहौल है। चांद दिखने के साथ ही आज पहली तरावीह की नमाज अदा की जाएगी और कल से रोजे शुरू हो जाएंगे। उधर सऊदी अरब में चांद दिखाई देने के बाद वहां रोजे पहले ही शुरू हो चुके हैं।

इस्लाम धर्म में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें सुबह से शाम तक रोजा रखकर इबादत की जाती है। यह महीना सिर्फ भूख और प्यास से दूर रहने का नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सब्र, अनुशासन और अच्छे कर्मों को अपनाने का अवसर भी माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ रमजान को जीवनशैली सुधारने का भी बेहतरीन समय माना जाता है। उपवास की परंपरा लगभग हर धर्म में किसी न किसी रूप में मौजूद है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित करने का संदेश देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार रोजा रखते समय खान-पान का संतुलन बेहद जरूरी है। इफ्तार से सहरी के बीच पर्याप्त पानी पीना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। नींबू पानी, नारियल पानी या सादा पानी बेहतर विकल्प हैं, जबकि अधिक मीठे पेय और कोल्ड ड्रिंक से बचना चाहिए।

इफ्तार हल्का और पौष्टिक रखना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना गया है। खजूर और पानी से रोजा खोलने के बाद फल, सलाद, दही और हल्का भोजन लेना बेहतर रहता है। तली-भुनी चीजों का सेवन कम करना चाहिए। वहीं सहरी में ऐसा भोजन लेना चाहिए जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखे, जैसे दलिया, दही और फल। अधिक नमक वाले भोजन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे प्यास अधिक लगती है।

डॉक्टरों का कहना है कि मधुमेह, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को रोजा रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए, ताकि दवाओं के समय और सेवन को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित किया जा सके।

रमजान का महीना इंसान को धैर्य, सहानुभूति और आत्मसंयम सिखाने के साथ-साथ समाज सेवा और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है। सही खान-पान और अच्छी आदतों के साथ यह महीना जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकता है।

 
 
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