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भ्रष्टाचार पर धामी का डंडा, हरिद्वार प्रकरण में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 6 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन

देहरादून। हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी को दोषी मानकर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कदम उठाया गया है।

शासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, तत्कालीन नगर आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त किए जाने की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, उस समय हरिद्वार में तैनात रहे एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतन वृद्धियां रोकने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए मामले की जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और वित्तीय ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई गई।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन और प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा जनहित सर्वोपरि हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

राज्य सरकार की इस कार्रवाई को उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 
 
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