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शिक्षा से सशक्तिकरण की मिसाल- डीएम की पहल से सपनों को मिली उड़ान

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 16 घंटे पहले
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देहरादून। आर्थिक तंगी, गंभीर पारिवारिक परिस्थितियों और अभिभावकों की बीमारी या निधन के कारण पढ़ाई से वंचित हो रही 34 जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को जिला प्रशासन ने फिर से शुरू कर दिया है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ के 13वें संस्करण में जिलाधिकारी सविन बंसल ने छात्राओं को चेक वितरित कर उनकी फीस जमा कराई।


इस चरण में करीब 9 लाख रुपये की धनराशि से बालिकाओं की बाधित शिक्षा पुनर्जीवित की गई। जिला प्रशासन के अनुसार अब तक लगभग 62 लाख रुपये खर्च कर 126 बालिकाओं की पढ़ाई दोबारा शुरू कराई जा चुकी है।



जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि जरूरतमंद बेटियों को शिक्षित कर उन्हें योग्य बनाना ही ‘नंदा-सुनंदा’ की सच्ची वंदना है। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा के प्रति समर्पित रहने, प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की जीवनियां पढ़ने और सफल होकर अन्य बालिकाओं के लिए रोल मॉडल बनने का संदेश दिया।



कार्यक्रम में कई भावुक पल भी देखने को मिले। कुछ अभिभावकों ने बताया कि फीस न भर पाने के कारण उनकी बेटियों को स्कूल से बाहर रखा गया, परीक्षा देने से रोका गया और पढ़ाई बीच में ही छूटने की नौबत आ गई थी। ऐसे में जिला प्रशासन की पहल ने उनके बच्चों का भविष्य संवार दिया।



योजना के तहत कैंसर पीड़ित पिता की बेटी सृष्टि की बीसीए पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई फिर शुरू हुई, जबकि पैरालाइज्ड पिता की बेटी शिवांगी की उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन ने संभाली।


पिता को खो चुकी या आर्थिक संकट से जूझ रहीं अलाईना रावत, आकृति बडोनी, तनिका, लावण्या, दिव्या, नंदनी, ईशिका सहित अन्य बालिकाओं की पढ़ाई भी पुनर्जीवित की गई।


कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास, जिला प्रोबेशन अधिकारी सहित अन्य अधिकारी और अभिभावक मौजूद रहे। जिला प्रशासन ने इसे बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

 
 
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