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गुरु राम राय की अकादमिक विरासत को मिला वैश्विक विस्तार, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफल

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 11 घंटे पहले
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देहरादून। सतत विकास के वैश्विक एजेंडे को लेकर गंभीर मंथन करते हुए श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में “सतत विकास लक्ष्यः चुनौतियाँ एवं प्रगति” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। विश्वविद्यालय के पथरीबाग परिसर स्थित सभागार में हाइब्रिड मोड में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक-आर्थिक विकास और सतत विकास लक्ष्यों पर गहन चर्चा की।

विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट श्रीमहंत देवेंद्र दास ने आयोजन पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ।

कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है। मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रो. (डॉ.) प्रीति तिवारी ने सतत विकास को मानव समाज के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। वहीं डीन छात्र कल्याण प्रो. (डॉ.) मालविका कांडपाल ने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना बढ़ाने वाला बताया। सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुरेंद्र कौर रावल ने आयोजन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य स्पष्ट किए।

मुख्य अतिथि पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद् प्रेम चन्द्र शर्मा ने रसायन-मुक्त खेती और जैविक कृषि को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) मोहन सिंह पंवार, विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, ने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता संरक्षण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनिवर्सिटी ऑफ केलनिया की डॉ. के. एल. वात्सला गुणवर्धने ने वैश्विक सहयोग और वैज्ञानिक नीतियों की आवश्यकता बताई। वहीं थम्मासट विश्वविद्यालय के डॉ. मोहम्मद फहीम ने नवाचार आधारित अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर बल दिया।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. महविश अंजुम ने कार्यस्थलों की एर्गोनॉमिक समस्याओं और एआई आधारित समाधानों पर चर्चा की, जबकि डॉ. हसीबुर रहमान ने जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को रेखांकित किया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) विजय कांत पुरोहित ने हिमालयी जैव-विविधता और औषधीय पौधों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए और नीति-निर्माण, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों पर व्यापक विमर्श हुआ। सम्मेलन के सफल संचालन में सह-संयोजक प्रो. गीता रावत, डॉ. शिल्पी जैन और सचिव डॉ. सुनील किश्तवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक, विभागाध्यक्ष और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 
 
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