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कम दर्द, तेज रिकवरी और बिना निशान— इंदिरेश अस्पताल की आधुनिक थायरॉयड सर्जरी चर्चा में

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 5 घंटे पहले
  • 1 मिनट पठन

देहरादून। विश्व थायरॉयड दिवस (25 मई) के अवसर पर श्री महंत इंदिरेश अस्पताल ने थायरॉयड रोगों के उपचार में आधुनिक चिकित्सा तकनीक को बढ़ावा देते हुए “बिना निशान वाली थायरॉयड सर्जरी” (स्कारलेस थायरॉयडेक्टॉमी) की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी है। अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई तकनीक से मरीजों को बेहतर उपचार के साथ सौंदर्य संबंधी चिंता से भी राहत मिल रही है।


अस्पताल के कैंसर विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि पारंपरिक थायरॉयड सर्जरी में गर्दन पर चीरा लगाने के कारण निशान रह जाता था, लेकिन अब एंडोस्कोपिक एवं मिनिमली इनवेसिव तकनीक के माध्यम से बिना बाहरी चीरे के थायरॉयड की गांठ को हटाना संभव हो गया है। इससे मरीजों की रिकवरी भी पहले की तुलना में अधिक तेज और सहज हो रही है।


हेड-नेक ऑन्को सर्जन डॉ. पल्लवी कौल ने बताया कि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में यह सुविधा नियमित रूप से दी जा रही है तथा कई मरीज इस तकनीक का सफल लाभ उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती थायरॉयड कैंसर, थायरॉयड की गांठ और कुछ अन्य मामलों में यह तकनीक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आई है।


विशेषज्ञों के अनुसार इस आधुनिक सर्जरी के प्रमुख लाभों में कम दर्द, कम रक्तस्राव, अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहने की आवश्यकता और मरीज का शीघ्र सामान्य जीवन में लौट पाना शामिल है। अस्पताल ने लोगों से अपील की है कि गले में गांठ, सूजन, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें और समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लें

 
 
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