गुरुकुल की पावन भूमि से सामाजिक चेतना का संदेश, सांस्कृतिक अस्मिता पर बल
- Uttarakhandnews Network
- 12 घंटे पहले
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हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय में अखिल भारतीय अखंड परशुराम अखाड़ा द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर गुरुकुल के मुख्य अधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा को सनातनी परंपराओं को सुदृढ़ करने में उनके योगदान के लिए फरसा, चादर और पटका भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मान ग्रहण करने के उपरांत डॉ. शर्मा ने कहा कि राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका है और वर्तमान समय में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने आर्य समाज के महान नेता स्वामी श्रद्धानन्द के शुद्धि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज जागरण के लिए उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकुल सदैव राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण का केंद्र रहा है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरुकुल जैसी संस्थाओं की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए समाज को संगठित रहने का आह्वान किया। विद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को शास्त्र ज्ञान के साथ आत्मरक्षा, अनुशासन और नैतिक शिक्षा प्रदान करने की योजना पर भी जोर दिया, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बन सकें।
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि गुरुकुल की पावन भूमि से समय-समय पर समाज सुधार आंदोलनों का सूत्रपात हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने गुरुकुल की गौरवशाली परंपरा को और सशक्त करने तथा राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया। कई धार्मिक एवं सामाजिक गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में मौजूद रहे।







