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पूर्वोत्तर से उत्तराखंड तक शौर्य की पहचान बनी 14 असम राइफल्स, स्थापना दिवस पर दिखा एकजुटता का भाव

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 1 जन॰
  • 2 मिनट पठन

ऋषिकेश।

देहरादून के छिद्दरवाला स्थित एक भव्य बैंक्वेट हॉल में 14 असम राइफल्स बटालियन का 67वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास, गरिमा और सैन्य अनुशासन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं उनके परिजनों ने सहभागिता कर बटालियन के गौरवशाली इतिहास, वीरता और बलिदानों को स्मरण किया।

समारोह की अध्यक्षता सूबेदार मान सिंह बिष्ट ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन वारंट ऑफिसर सोबन सिंह नेगी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में देहरादून, कोटद्वार, ऋषिकेश, चमोली, नैनीताल सहित उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से पहुंचे पूर्व सैनिकों और वीर नारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने 14 असम राइफल्स की शौर्यगाथा और ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया गया कि बटालियन की स्थापना वर्ष 1959 में मेरठ में हुई थी। स्थापना के बाद से ही बटालियन ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद विरोधी अभियानों में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कार्यक्रम में करीब 40 पूर्व सैनिकों और 30 वीर नारियों (मातृ शक्ति) ने सहभागिता की। इस दौरान सभी ने आपसी संवाद के माध्यम से अपने सेवा काल की यादें साझा कीं, जिससे कार्यक्रम भावनात्मक और प्रेरणादायक बन गया।

14 असम राइफल्स का इतिहास वीरता पुरस्कारों से अलंकृत रहा है। बटालियन को अब तक 6 अशोक चक्र, 3 शौर्य चक्र, 14 सेना मेडल तथा 1 थल सेना अध्यक्ष प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जा चुका है, जो इसके शौर्य और बलिदान की जीवंत मिसाल हैं।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष सूबेदार मान सिंह बिष्ट ने सभी आगंतुकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और बलिदान की प्रेरणा देते रहेंगे।

इस अवसर पर कोटद्वार से मोहन सिंह बिष्ट, बद्री सिंह बिष्ट, ऋषिकेश से टीकाराम पुरोहित, बुद्धिबल्लभ पुरोहित, देहरादून से सूबेदार जगदीश भट्ट, सूबेदार दलीप राम, सूबेदार त्रिलोक सिंह रमोला, पुष्कर सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक एवं वीर नारियां उपस्थित रहीं।

 
 
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