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"गांव में लोकतंत्र या गृह मंत्रालय? पति-पत्नी आमने-सामने!"

  • लेखक की तस्वीर: Uttarakhandnews Network
    Uttarakhandnews Network
  • 19 जुल॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

ऋषिकेश। गढ़ी श्यामपुर ग्रामसभा का चुनाव इस बार किसी राजनीतिक अखाड़े से ज्यादा एक परिवारिक महाभारत बन गया है। प्रधान पद के लिए पति-पत्नी ही एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में कूद पड़े हैं। गाँव में लोग मज़ाक में कह रहे हैं—"रात को घर में एक थाली, दिन में दो-दो भाषण!"

इधर चुनावी माहौल में असली चर्चा सिर्फ एक नाम की है—लोकप्रिय जनप्रतिनिधि आशीष बॉबी रांगड़। क्षेत्र में उनके विकास कार्य और पकड़ के चलते बाकी दोनों उम्मीदवारों को लोग महज़ “घर की तकरार” मानकर देख रहे हैं।

गांव में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है—क्या पति-पत्नी की ये जंग सच में जनता की सेवा के लिए है या सिर्फ वोट काटने की राजनीति, ताकि आशीष को टक्कर दी जा सके? लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आशीष का प्रभाव इतना गहरा है कि लोग कहते हैं, “जो काम वर्षों में नहीं हुआ, वो बॉबी रांगड़ ने अपने क्षेत्र पंचायत सदस्य कार्यकाल में कर दिखाया—बाकी तो बस शोर मचा रहे हैं।”

अब सवाल ये है कि यह चुनाव ग्रामसभा की तरक्की तय करेगा या सिर्फ “घर का हिसाब”? लोगों की नज़रें फिलहाल सिर्फ आशीष पर टिकी हैं—क्योंकि बाकी दोनों की लड़ाई तो “जग के लिए हास्य का विषय” बन चुकी है।

पूर्व प्रधान पति और निवर्तमान प्रधान पत्नी का एक ही घर से उठने के पीछे का कारण बताया जा रहा है कि पूर्व प्रधान जयेंद्र पाल सिंह रावत अपने तत्कालीन समय पर तमाम विकास कार्यों की आड़ में लाखों का सरकारी बजट गमन के आरोप लगे थे, जो जांच में सिद्ध में पाए गए और जिनमें रिकवरी भी हुई और कुछ रिकवरी बकाया भी है अभी तक, यही कारण है कि पूर्व प्रधान जयेंद्र पाल सिंह रावत ने अपने और अपनी पत्नी नीलम रावत जो कि अभी निवर्तमान प्रधान है, दोनों का नामांकन करवाना पड़ा और अब दोनों को आमने सामने चुनाव लड़ना पड़ रहा है। देखने वाली बात तो यह होगी कि पूर्व प्रधान जयेंद्र पाल सिंह रावत अपने लिए वोट मांगेंगे या अपनी निवर्तमान प्रधान पत्नी नीलम रावत के लिए ? और नीलम रावत किसके लिए वोट मांगेगी अपने लिए या अपने पूर्व प्रधान पति के लिए?

जानकारी के लिए बता दें गढ़ी श्यामपुर ग्राम सभा में प्रधान पद के लिए 3791 वोटर अपना प्रधान चुनेंगे, जिसमें देखने वाली बात यह होगी कि मत का प्रतिशत कितना रहता है और कितने वोट किसको पढ़ते है।

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